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Question -

ओजोन छिद्र से आप क्या समझते हैं? इसके परिणाम क्या हैं?



Answer -

सन् 1980 में वायुमण्डलीय वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका पर कार्य करते हुए दक्षिणी ध्रुव के ऊपर ओजोन परत के क्षय, जिसे सामान्य रूप से ‘ओजोन-छिद्र’ कहते हैं, के बारे में बताया। यह पाया गया कि ओजोन छिद्र के लिए परिस्थितियों का एक विशेष समूह उत्तरदायी था। गर्मियों में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड परमाणु [अभिक्रिया (i)] क्लोरीन मुक्त मूलकों [अभिक्रिया (ii)] से अभिक्रिया करके क्लोरीन सिंक बनाते हैं, जो ओजोन-क्षय को अत्यधिक सीमा तक रोकता है। जबकि सर्दी के मौसम में विशेष प्रकार के बादल, जिन्हें ‘ध्रुवीय समतापमण्डलीय बादल’ कहा जाता। है, अंटार्कटिका के ऊपर बनते हैं। ये बादल एक प्रकार की सतह प्रदान करते हैं जिस पर बना हुआ क्लोरीन नाइट्रेट (अभिक्रिया (i)] जलयोजित होकर हाइपोक्लोरसे अम्ल बनाता है [अभिक्रिया (ii)]। अभिक्रिया में उत्पन्न हाइड्रोजन क्लोराइड से भी अभिक्रिया करके यह आण्विक क्लोरीन देता है।

वसन्त में अंटार्कटिका पर जब सूर्य का प्रकाश लौटता है, तब सूर्य की गर्मी बादलों को विखण्डित कर देती है एवं HOCI तथा Cl2 सूर्य के प्रकाश से अपघटित हो जाते हैं (अभिक्रिया v तथा vi)।

इस प्रकार उत्पन्न क्लोरीन मूलक, ओजोन-क्षय के लिए श्रृंखला अभिक्रिया प्रारम्भ कर देते हैं।

ओजोन छिद्र के परिणाम (Results of Ozone hole)
ओजोन छिद्र के साथ अधिकाधिक पराबैंगनी विकिरण क्षोभमण्डल में छनित होते हैं। पराबैंगनी विकिरण से त्वचा का जीर्णन, मोतियाबिन्द, सनबर्न, त्वचा-कैन्सर, कई पादपप्लवकों की मृत्यु, मत्स्य उत्पादन की क्षति आदि होते हैं। यह भी देखा गया है कि पौधों के प्रोटीन पराबैंगनी विकिरणों से आसानी से प्रभावित हो जाते हैं जिससे कोशिकाओं का हानिकारक उत्परिवर्तन होता है। इससे पत्तियों के रंध्र से जल का वाष्पीकरण भी बढ़ जाता है जिससे मिट्टी की नमी कम हो जाती है। बढ़े हुए पराबैंगनी विकिरण रंगों एवं रेशों को भी हानि पहुँचाते हैं जिससे रंग जल्दी हल्के हो जाते हैं।

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